पद्मावत
पद्मावत; शानदार पटकथा, निर्देशन, दृश्य, धुन-संगीत से गुम्फित एक विजुअल ट्रीट है. अभिनय कमोबेश न्यायपूर्ण है. बहुत कुछ आँखें भी बोलती हैं, और जहाँ-जहाँ आँखें बोलती हैं, इसकी गूँज हमें महसूस होती है. नई पीढ़ी की राजनीति भी तो अभिनय की माँग करती है, और यह सफल भी है. यह भी उस अकल्पनीय दृश्य को आंखों से ओझल होने नहीं देता है, जिसमें आम जन का अवचेतन गोता लगाता है और जनता मुग्ध सी हो जाती है. पद्मावत भी ऐसा ही दृश्य जाल रचता है.
एक कहानी थी, "An Astrologer's day", जिसमें भविष्यवक्ता अपने घर देर से लौटने पर संभाव्य कहा-सुनी से बचने के लिये, घर मे दाखिल होते ही पैसों की थैली आगे फेक कर किसी को कोसने लगता है. राजपूती शौर्य की गाथा का महिमामंडन किये जाने के वावजूद इसके साथ करणी सेना का विवाद भी ऐसा ही एक विवाद रहा है. वैसे भी संजय लीला भंसाली के कैनवास में हिंदुत्व का रंग सुर्ख ही है. और अभी भावनाओं के आहत होने का दौर भी उफान पर है. कभी गाय पर तो कभी चाय पर हमारी भावनाएं आहत हो जा रही हैं.
अलाउद्दीन खिलजी का ऐसा वीभत्स रूप शायद इतिहास ने न बताया हो. लेकिन.. फ़िल्म ऐतिहासिक है भी तो नहीं, एक आख्यान पर कला सृजन की छूट फ़िल्म लेती भी तो रही है. हाँ, फ़िल्म अगर इतिहास के होने का दावा करती है तो फिर उसे ऐतिहासिक मानकों पर खड़ा होना ही चाहिए.
लेकिन फ़िल्म विधा की भी सीमाएं हैं, इसका ख्याल हमें रखना चाहिये. इसके कुछ कला पक्ष तो कुछ व्यावसायिक पक्ष भी होते हैं. फिल्में इसकी उद्घोषणा भी सबसे पहले करती है. फिर फिल्में मूलतः इंटरटेनमेंट है, अगर उससे सकारात्मक संदेश कहीं तक जाता है तो यह उसका 'बाय प्रोडक्ट' मात्र है, यह हमें समझना होगा. फ़िल्म विधा तभी साँस ले सकेगी. फिर भी, भंसाली जौहर को गौरव के भाव मे प्रस्तुत न कर इसे इसके विदारक पहलू पर छोड़ सकते थे. लेकिन ऐसा न हो सका, यह निर्देशक की सीमा है.
खैर,
बाकी बातें हर किसी के अपने अपने स्तर से जहन में आएगी. गौर करने के अपने-अपने बिंदु होंगे लेकिन, इस पद्मावती विवाद के बहाने, प्रशासन की चाक चौबंद व्यवस्था भी विजुअल ट्रीट सरीखा है. इसमें कोई शक नहीं. #Padmawat
बाकी बातें हर किसी के अपने अपने स्तर से जहन में आएगी. गौर करने के अपने-अपने बिंदु होंगे लेकिन, इस पद्मावती विवाद के बहाने, प्रशासन की चाक चौबंद व्यवस्था भी विजुअल ट्रीट सरीखा है. इसमें कोई शक नहीं. #Padmawat
Comments
Post a Comment