ध्रुवतारा
हम-तुम
ध्रुव-तारे हैं
दो विपरीत छोर के
तारों की पगडंडियां हालांकि
हमारे बीच सेतु हैं
पर
राह में विचलन ऐसी कि
राह मुकम्मल नहीं हो पाता
हमारी नियति
अपने-अपने ध्रुव पर चमकने की है
है न!
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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