चंद मिसरे
१.
वो करते हैं मेरा क़त्ल मेरे वसीयत की मियाद तक
अगले रोज आते हैं सर झुकाए, मेरा दस्तख़त लेने।
२.
जो गम मिले तुमसे मुझे उसे भूला दिया
हुई मोहब्बत खुद से, मेहँदी लगा लिया।
३.
मुद्दत हुई उनसे बात हुए कहने को जो अपने हैं
रूठे थे जो मुझसे, उनको गले लगा लिया।
४.
दुश्मन थे मेरे अपने कई उनको भूला दिया
दर्द था मेरे सीने में जो, उसे दवा बना लिया।
५.
उसने अलग आसमान ढूँढा उड़ान के लिये
मैंने अपनी मिट्टी को, सर माथे लगा लिया।
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