उम्मीद

नवंबर दो हजार सत्रह
रिपोर्ट बी.बी.सी.
कश्मीर में नही खिले इस साल केसर के फूल
मिट्टी थी, धूप थी
और हवा भी,
नमीं रही थी बस थोड़ी दूर
इस रिपोर्ट से
मैं किसान डर सा गया हूँ
संसाधन तो और भी सीमित हैं मेरे पास
मैं केवल मिट्टी हूँ
तुम हो हवा, धूप और नमीं

फिर भी
मैंने मिट्टी में बोया है बीज उम्मीद का
बताओ न तुम
उस पौधे में फूल खिलेंगे ? खिलेंगे न !

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