महिला-दिवस/Women's Day
नारी तुम केवल श्रद्धा हो
पर,
इस बात पर खुश न होओ
बस शब्द संयोजन अच्छा है
प्रयोजन नहीं
क्यों तुम ही श्रद्धा हो !
क्यों तुम ही त्याग की प्रतिमूर्ति हो !
क्यों तुम ही कुल की इज्जत हो!
क्यों तुम ही सबकुछ हो !
इन विशेषणों से कहीं
तुम्हारे सवाल करने के अधिकार को
एक रेशमी तह में दबा तो नहीं दिया जाता है न!
क्योंकि
कलतक सवाल और अधिकार मांगती औरत अमूमन कुतिया होती थी
तुम सब कुछ थीं
जब तक तुमनें इस 'क्यों' को जानना नहीं चाहा था
बस एक बार
'क्यों' की आवाज मुखर करके देखो
तुम्हें मुखौटों के अंदर की परतें खुलती दिखेंगी
अगर इन खुलती परतों के दरम्यान भी तुम श्रधेय हो तो
बेझिझक इन विशेषणों को स्वीकार करना।
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