मृत्यु

मृत्यु शाश्वत है
होगें दफ़न या फिर राख
मिलेंगे मिट्टी में ही
फिर,
एक रोज
उस मिट्टी में उगेंगे पौधे
और हम
खिलेंगे उस पौधे के फूल में
मृत्यु उत्सव है.

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