ईश्वर, सुनो

ईश्वर,
तुम्हारे चौखट एक मासूम की अस्मत दफ़्न हुआ
और तुम मूक थे!
तुम कैसे मूक रहे!
ईश्वर,
तुम फिर से पलायन कर गए न!
कैसे कह देते हो कि बगैर इच्छा तुम्हारे
नहीं कुछ भी मुमकिन!
क्या इसे भी तुम्हारी स्वीकारोक्ति समझा जाए?
नहीं न!
तो ईश्वर सुनो, अगर सुन सकते हो तो
धो लो अपना कलंक,धो सकते हो तो
नहीं तो,
छोड़ो अपना स्वांग, और करो घोषित
नहीं रहा अब तुम्हारी सत्ता में सामर्थ्य
तुमने खो दिया है, ईश्वर होने का अर्थ.

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