सत्ता का चरित्र
जब न्याय मौन हो
तो
असहमति के सुर उठते हैं
तो
असहमति के सुर उठते हैं
इसे
अनदेखा करना
सत्ता के सीने पर चुभता है
सत्ता की चूलें हिलती हैं
अनदेखा करना
सत्ता के सीने पर चुभता है
सत्ता की चूलें हिलती हैं
फिर,
अन्याय मुखर होता है
क्या बच्चे क्या बूढ़े
क्या मर्द क्या औरत
क्या पक्ष क्या विपक्ष
इनका दमन होता है
अन्याय मुखर होता है
क्या बच्चे क्या बूढ़े
क्या मर्द क्या औरत
क्या पक्ष क्या विपक्ष
इनका दमन होता है
ऐसा
अघोषित, अलिखित संविधान
सत्ता के चरित्र का होता है !
अघोषित, अलिखित संविधान
सत्ता के चरित्र का होता है !
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