रिश्ते - गुलाल - रंगोली

कुछ रिश्ते 
बेनाम से होते हैं
जिसके तंतु ...
रूह से जुड़ते हैं.

ये रिश्ते प्यार के पार चले जाते हैं.
हो जाते हैं
विलीन , अंतस में.


____________


लिये थे गुलाल तुने
मेरे लिये जो पिछली दफे
रह गया था अछूता
यूँ ही
तुम्हारे निश्छल प्रेम के आगे

संजो लिया है इसे अबकी
देखा उसपर ...
तुम्हारे अक्स हैं.

____________

तुम्हारे हर लफ्ज़ों में
एक उत्सव है
एक स्पंदन है
एक रंग है
सुर्ख, धानी, श्वेत
कुछ श्याम, और
रंगों के युग्म भी
जिसे मैं
सहेजता गया
अपने अंतस में,
अब इस कैनवास पर
रंगोली उभर आया है.
______________





Comments

Popular Posts