जुम्बिश
तुम उदास न हुआ करो
तुम चुप भी न रहा करो
तुम्हारी उदासी
सफर करती है मुझतक
यह अटक जाती है
मेरे हृदय के कपाट में
लब खुले तुम्हारे
तो इसे राह मिले
तुम्हारे लबों की जुम्बिश चाहिए इसे.
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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