जुम्बिश

तुम उदास न हुआ करो
तुम चुप भी न रहा करो

तुम्हारी उदासी 
सफर करती है मुझतक 
यह अटक जाती है
मेरे हृदय के कपाट में

लब खुले तुम्हारे
तो इसे राह मिले

तुम्हारे लबों की जुम्बिश चाहिए इसे.

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