मैं राह देखता हूँ

जब चाँद अपने सैर पर निकलता है
अक्सर,
दबे पाँव कोई आता है मेरी तरफ
दरवाजे पर एक धीमा दस्तक देता है
मैं हर दफे सांकल खोलता हूँ
लेकिन,
तबतक वो लौट जाता है
चाह कर भी उसे आवाज लगा नहीं पाता मैं
बस खामोशियों में शब्द गूंथता हूँ
राह देखता हूँ
मैं राह देखता रहता हूँ.

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