नाटक मंचन गावँ का
उत्साही नवयुवकों ने जमाई चौकड़ी
तय किया अबकी भी खेलेंगे नाटक।
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काफी पहले से यह उदघोषणा होती रही
बस कुछ मिनटों में ही नाटक शुरू हुयी।
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नाटक मंचित परिसर में फिर
दर्शक थे लबालब प्रारम्भ से
अदाकार थे गदगद देख भीड़
भीड़ थी खुश नाटक होने से.
बाई जी की थिरकन से
शुरूआत हुआ नाटक का
गुंजित हुआ परिसर वाह-वाह से.
प्रथम दृश्य के बाद तुंरत
था दूसरा दृश्य; दबे स्वर में
दर्शक दीर्घा के एक कोने से
आने लगी मांग________
दृश्यों के मध्य अंतराल को
दिया जाय उचित सम्मान
दरअसल इस ओर ज्यादा
कौतुहल था बाई जी का।
दूसरी तरफ दृश्यों के रसिक
पालथी मार बैठे थे नीचे चुप
नज़रें थी उनकी घटनाक्रम पर.
कुछ दर्शक थे मांग विहीन
हर व्यवस्था में ढल जाने का
था उनके पास हुनर
इस कश्मकश के बीच
हुआ समापन नाटक का
और बीत गयी रात।
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हाँ इसी के बीच में अगर जोड़ दें
दो गुटों के बीच की हिंसक झड़प
तो हुई बात गत साल के नाटक की
वैसे रात भी हुई थी खूब तकरार.
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