अयोध्या
राम !
सुना है कि अयोध्या में तुम जहाँ हो जाने की जद्दोजहद कर रहे हो अब
वहाँ अल्लाह नहीं तुम ही थे तब
वहाँ अल्लाह नहीं तुम ही थे तब
तुमने विरोध नहीं किया था क्या!
तुममें सामर्थ्य नहीं रही थी या मर्यादा से बंधे रहे
या अल्लाह भी तुम ही थे और राम भी
या फिर अपना राज्य छोड़ दिये थे एक दिन!
तुममें सामर्थ्य नहीं रही थी या मर्यादा से बंधे रहे
या अल्लाह भी तुम ही थे और राम भी
या फिर अपना राज्य छोड़ दिये थे एक दिन!
इधर तुम्हारी वापसी कई सालों से कराई जा रही है
कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम कहीं चिर-निंद्रा में हो मग्न
तुम्हें ही तुम्हारे घर-वापसी की नहीं कोई खबर
कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम कहीं चिर-निंद्रा में हो मग्न
तुम्हें ही तुम्हारे घर-वापसी की नहीं कोई खबर
अगर ऐसा नहीं है तो
तुम केवल राम ही थे राम, ईश्वर नहीं
अपना राज्य छोड़े नही थे तुम, अबकी वनवास हुआ था तुम्हारा
तुम केवल राम ही थे राम, ईश्वर नहीं
अपना राज्य छोड़े नही थे तुम, अबकी वनवास हुआ था तुम्हारा
तो फिर अब देर कैसी
कब खत्म होगा वनवास तुम्हारा!
अब इस मुल्क में
अल्लाह तो वैसे भी पड़ोस के मुल्क का है.
कब खत्म होगा वनवास तुम्हारा!
अब इस मुल्क में
अल्लाह तो वैसे भी पड़ोस के मुल्क का है.
Comments
Post a Comment