प्रेम

प्रेम
सुर्ख लाल गुलाब पर
ओस की बूँद ही नहीं

प्रेम
केवल तुम्हारा खुदा
या मेरा राम ही नहीं

प्रेम
दो दिलों के धड़कनों की
फ़ांस भी है

जो कभी निकलती नहीं
साँसों में अटकी रहती है.

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