गुलाल

जरा सी झपकी क्या ली रात ने
चाँद ने मुट्ठी भर गुलाल झोंक दिया है अम्बर में 

सुनो,
तुम जरा उस कुएं से 
प्रेम के मटके में पानी लाना

अम्बर को सींचना है
गुलाल के कलम बोने हैं.

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