गुलाल
जरा सी झपकी क्या ली रात ने
चाँद ने मुट्ठी भर गुलाल झोंक दिया है अम्बर में
सुनो,
तुम जरा उस कुएं से
प्रेम के मटके में पानी लाना
अम्बर को सींचना है
गुलाल के कलम बोने हैं.
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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