रात के पिछले पहर
दस्तक हुयी यादों की
दिल की जमीं पर
रात के पिछले पहर
दिल की जमीं पर
रात के पिछले पहर
अफसानों के पौधों पर
फिर फूल खिले अरमानों के
रात के पिछले पहर
फिर फूल खिले अरमानों के
रात के पिछले पहर
याद है खूब लड़े थे एक रोज
रिश्तों पर हमदोनों
रात के पिछले पहर
रिश्तों पर हमदोनों
रात के पिछले पहर
कुछ-कुछ टूटा था उस दिन
अपने-अपने दिल के अन्दर
रात के पिछले पहर
अपने-अपने दिल के अन्दर
रात के पिछले पहर
दूर हुए, वक़्त बीता
गए हम-दोनों फिर पास आये
रात के पिछले पहर
गए हम-दोनों फिर पास आये
रात के पिछले पहर
उतरे, डूबे-तीरे दिल की जमीं पर
मुद्दतों के बाद
रात के पिछले पहर.
मुद्दतों के बाद
रात के पिछले पहर.
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