इश्क बोया था

रेत पर मैंने
इश्क बोया था

एक दफा

मुद्दतें हुई
कितनी ही बारिशें हुई
रेत जमी नहीं

अबकी बारिश में
उसमें फूल आये हैं 

तुम आई हो.

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