इश्क बोया था
रेत पर मैंने
इश्क बोया था
इश्क बोया था
एक दफा
मुद्दतें हुई
कितनी ही बारिशें हुई
कितनी ही बारिशें हुई
रेत जमी नहीं
अबकी बारिश में
उसमें फूल आये हैं
उसमें फूल आये हैं
तुम आई हो.
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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